मंगलवार, 19 दिसंबर 2023

आज के मनुष्यों का सत्य और अहिंसा  के मार्ग पर चलना वैसा ही है जैसा आधुनिक राष्ट्रों का निःशस्त्रीकरण की नीति अपनाना है। क्योंकि, अब आगे कोई मार्ग ही नहीं बचा। पहले ही इतने भयंकरतम शस्त्र बना लिए हैं, एटम बम वगैरह , की अगर अब सम्मिलित राय से निशस्त्रीकरण नहीं अपनाया तो मामूली सी बातों पर युद्ध की नौबत आएगी, तो फिर अपनी रक्षा के लिए एटम बम चुनने पड़ेंगे और उनसे तो अपने खुद के देश ही नष्ट हो जाएंगे।

हमारा सत्य और अहिंसा पर चलना भी वैसा ही है। क्योंकि आधुनिक मनुष्य दूसरे की मंतव्य को समझने, और भावुकता आदि भावों से इतने ऊपर हो चुकें हैं कि, सिवाए अपने मन्तव्य के प्रति स्पष्ट  रहने के अब कोई उपाय ही नहीं है। 

कोई किसी का रिश्तेदार नही है ।

...

 सत्य आदि पांच प्रतिज्ञाओं  को अगर कोई सम्प्रदाय विशेष से जोड़कर देखते है तो यह विमूढता के सिवाय कुछ भी नही । किसी के असली रिश्ते भी इस आचरण के बिना नही निभ सकेंगे । (प्रतिज्ञा कह लो या आचरण कह लो। शास्त्रीय नाम आगार धर्म है । आगार चारित्र है । ) भाई भाई से चोरी करे तो वह भाई रहेगा क्या ?

#जैसा मुझे समझ आया है ।

...


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें