मंगलवार, 26 दिसंबर 2023

साहित्य का आस्वादन इतना कीमती है फिर भी इसके विमर्श की जगहों पर भीड़ क्यों नहीं , यह क्लांति भी वर्तमान लेखकों का विषय रही है ।

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One day late post -

सुशोभित कितने समय से उपनिषद सीरीज लिख रहे हैं। मैं सारी पढ़ती हूँ और अपने पढ़े गए जैन दर्शन की शब्दावली में समझने की कोशिश करती हूँ। अब तक कोई कनेक्ट नहीं मिल पा रहा था। अब लगता है कि कुछ एक बिंदु कनेक्ट का मिला है। यह पोस्ट उनकी हृदय पोस्ट की बात को आगे बढ़ाते हुए हैं।

जैन दर्शन में परमाणु पुद्गल नाम से तत्व का जिक्र आता है। इसकी आठ प्रकार की वर्गणा (categories) है । जिसके आगे भी बहुत भेद- उपभेद है।

इनमे एक है -मनो वर्गणा । 

इसका तात्पर्य है कि जिसे हम मन या हृदय (ये दो नही है ।बल्कि किन्ही पुण्य आत्माओं के विस्तृत भाव प्रसार को , दूसरे मनुष्यों की स्वार्थ मनोभावना से अलगाने के लिए दो अलग शब्द कह लिए गए हैं ।)* कहते है , उनकी किस्म तात्विक रूप से दूसरे द्रव्यों से भिन्नहै ।

cont

* अब तत्व की दृष्टि से देखो तो एक है । बट इनके अनुभव की दृष्टि से देखो तो अलग है । दृष्टि की यह विभिन्नता नय कहते है ।

चीजों को तत्व की दृष्टि से देखना is more like science,  objectivity kind of thing  .

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