जब हमने शुरुआत की थी तब हम स्ट्रिक्टली चुने हुए लोगों पर ही टिके थे ।एक समय वह भी आया- नो वेकेन्सी भी कहा । लेकिन जैसे जैसे बात आगे चली , आगे लोगो के साथ और स्नेह ने 'आदर न करें' यह असंभव कर दिया ।
मुझे तो सब पसंद है। mk , गीता, अंकिता जैन, सुशोभित, अविनाश।
बट आप समझते हो । बिना पांच पैसे लिए-दिए भी लेखको के झगडे सबने देखे है ।
मै इतने ही को रोज पढती हूं । और भी बहुत से होंगे ।
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मैने अभी तक कई कहानियाँ भेजी हैं , बट सब वापिस आ गई। पर मैने आशा नही छोड़ी है ।
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पता नही । मन में कोई फीलिंग नही आ रही ।
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