बुधवार, 6 दिसंबर 2023

पक्ष -विपक्ष के बीच मे एक आख्यान सुर-असुर का है । नेक टू नेक स्पर्द्धा। काँटे की टक्कर टाइप । दोनो बराबर के एक्टिव ।

बट आगमों मे मैने देखा कि असुरों का वर्णन नकारात्मक नही है । वे भी समान ऋद्धि सम्पन्न , परिवार सम्पन्न बताए गए है । बट उनके स्थान नीचे है । शक्ति का भी अंतर है ।

हमारे यहां ऊंचे देवों के लक्षणों मे उनकी प्रशान्तता , अल्प इच्छा और शुभता कही गई है ।

मोह की मंदता से यह संभव होता है ।

यह मोह की मंदता के कारण ही है कि इन्सान को राग -द्वेष दो नही , एक नजर आते है ।

दुनिया  राग को बंधन मानती है । जैन धर्म मे द्वेष को भी बंधन माना गया है ।  

धर्म के सुनने से पहले द्वेष  संयमित होता है । (negative force)। फिर जाकर राग के संयम की बारी आती है । अंततः तो  उसे भी छोड़ना है ।

यह सब चिन्तन ज्ञान -अज्ञान को देखने से अपने आप डेवलप होता है ।

आठ कर्मों मे मोहनीय कर्म को सबसे बलवान बताया गया है ।

#beware what u say .# concentrate on your doing.

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