बुधवार, 14 अगस्त 2024

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In life , ppl fall in love and they do not know when did it happen ,

Similarly I became conscious of aagam knowledge without knowing it . 

I can point the moments , bt how did it happen is unexplainable. 

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जैन आगमो के अध्ययन ने मेरी दृष्टि को बदल दिया है । 

अब मेरे जीवन में चीजों का वरीयता क्रम यह है - कामना( धन , मुझे प्रसिद्धि की कभी कामना नही रही । )<भावना (प्रेम<परिवार<देश<गुरु-धर्म*)<विमर्श < सम्यक दर्शन <देश विरति श्रावक चारित्र। 

सच्चे सुख के आकांक्षी व्यक्ति के जीवन का यही वरीयता क्रम होना चाहिए। यह भूमिका बुद्धिजीवी वर्ग निभा सकता है । बट वहां तो आपस की जलन ,होड़ का ही आर-पार नही है ।खैर

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पहले इस क्रम में कुछ उल्ट -फेर थी । मैं भावना को सर्वाधिक महत्व देती थी । 

पर अनुभवों ने दिखाया कि चीजें वैसी नही होती , जैसी वे दिखती है 

।बट जो हुआ है बहुत शुभ हुआ है।

यह क्रम महावीर वाणी ने ही सीधा किया है ।

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मैने यह भी देखा है कि ज्यादातर लोगों के जीवन मे यह क्रम > इस निशान का होता है । इसमे आमजन तो हैं ही , बुद्धिजीवी भी आ जाते है ।

ऐसे लोगों को मेरी स्लो मोशन की बातें प्रवचन लग सकती हैं ।

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मैं कोई संघर्ष महसूस नही करती । बल्कि मुझे तो लगता है महावीर स्वामी जी की कृपा से सभी संघर्ष समाप्त हो गए हैं  । चीजें जब होंगी , तब होंगी। 

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*मेरा देश प्रेम का नजरिया भी धर्म से प्रेम का फल है ।देश प्रेम की सोच एक सीमा के भीतर के मनुष्यों तक है ।धर्म की सोच में सभी जीवित प्राणी आ जाते हैं ।

जिसमे सबसे बढ़कर,  जैन धर्म मे तो छ जीवनिकाय की अहिंसा तक बात गई है ।

 


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