हमारे यहाँ गुरुदेवों के सानिध्य मे उत्तराध्ययन के अध्ययन याद कराने का प्रोग्राम चल रहा है । मुझे 25वां अध्ययन मिला है । इसमें 45 गाथाएं हैं ।
गुरुदेव रामप्रसाद जी म फरमाते थे -संस्कृत में श्लोक और प्राकृत में गाथा ।गाथा प्राकृत का अपना छन्द है ।
मुझे छन्द अनुशासन का ज्ञान नही है । जैन आगमों का अध्ययन छन्द की दृष्टि से भी हो सकता है ।
अभी तो याद करनी शुरू की हैं । सारी कच्ची हैं । ऐसा लगता है वापिस बच्ची हो गई हूं ।
याद करना ।सुनाना ।😊
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That's how I hv always been like .
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कम से कम शब्दों में अपनी बात कहना , प्राकृत में यह गुण कमाल का है ।
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