In continuation with previous post -
मेरे तो पेट मे गुडगुड सी हो जाती है । संदेहवाद एटसेटरा सुनकर।
शायद इसीलिए कहा गया है कि एक हद के बाद विद्वता बोझ हो जाती है ।
गुरूदेव रामप्रसाद जी म एक शेर सुनाते थे -
गुजर जा अक्ल से आगे कि
ये नूर , चिरागे राह है मंजिल नही ।😊
.....
Belated friends day to all on fb . Here I feel peace . There , I hv many relatives also + likes ki problem.
....
जिसे हम सुनहरी सांझ मे छोड़कर जाना कहते हैं , उसी को शास्त्रीय भाषा मे मर्यादा कहते हैं ।
खाली समझ की बात है ।
यूं भी कोई सदा के लिए राज नही कर सकता ।
इस समझ को पहले ही ज्ञान के अभ्यास से प्राप्त कर लेना , पंडित होने का लक्षण है ।
#मनीष सिंह की पोस्ट पढ़कर
....
श्रावक के पांचवे व्रत 'परिग्रह परिमाण व्रत ' के पालन की तीन तरतमता-
जघन्य -कम से कम - अभी है नही । पर मेरे पास अमुक धन हो ,तो उससे आगे के परिग्रह का त्याग ।
मध्यम - बीच की अवस्था - जितना मेरे पास धन है , उससे आगे के परिग्रह का त्याग ।
उत्कृष्ट- उत्तम- जितना मेरे पास धन है , वह मेरी आवश्यकता से ज्यादा है । जरुरत अनुसार, रखकर बाकी का त्याग।
- प्रवचन अंश - गुरूदेव श्री ज्ञान मुनि जी म - 5.8.24 sector 11 rohini.
....
A child in a candy shop - had that feeling seeing yesterday's rahul gandhi ji's video of jaitram cobbler meeting.
...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें