मंगलवार, 6 अगस्त 2024

In continuation with previous post - 

 मेरे तो पेट मे गुडगुड सी हो जाती है । संदेहवाद एटसेटरा सुनकर। 

शायद इसीलिए कहा गया है कि एक हद के बाद विद्वता बोझ हो जाती है ।

गुरूदेव रामप्रसाद जी म एक शेर सुनाते थे - 

गुजर जा अक्ल से आगे कि

 ये नूर  , चिरागे राह है मंजिल नही ।😊

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Belated friends day to all on fb . Here I feel peace . There , I hv many relatives also + likes ki problem. 

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जिसे हम सुनहरी सांझ मे छोड़कर जाना कहते हैं , उसी को शास्त्रीय भाषा मे मर्यादा कहते हैं ।

खाली समझ की बात है । 

यूं भी कोई सदा के लिए राज नही कर सकता । 

इस समझ को पहले ही ज्ञान के अभ्यास से प्राप्त कर लेना , पंडित  होने का लक्षण है ।

#मनीष सिंह की पोस्ट पढ़कर 

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श्रावक के पांचवे व्रत 'परिग्रह परिमाण व्रत ' के पालन की तीन तरतमता-

जघन्य -कम से कम -  अभी है नही । पर मेरे पास अमुक धन हो ,तो उससे आगे के परिग्रह का त्याग ।

मध्यम - बीच की अवस्था - जितना मेरे पास धन है , उससे आगे के परिग्रह का त्याग ।

उत्कृष्ट- उत्तम- जितना मेरे पास धन है , वह मेरी आवश्यकता से ज्यादा है । जरुरत अनुसार, रखकर  बाकी का त्याग। 

 - प्रवचन अंश - गुरूदेव श्री ज्ञान मुनि जी म - 5.8.24 sector 11 rohini.

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A child in a candy shop - had that feeling seeing yesterday's rahul gandhi ji's video of jaitram cobbler meeting. 

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