शुक्रवार, 16 अगस्त 2024

भावना भी नही , भावना पर  सिर्फ श्रद्धा भी इतनी चमत्कारिक और शक्तिशाली और रक्षक होती है ,

फिर उस मार्ग पर चलना तो अवश्य सुख शांतिदायक है ।

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बाकी शब्दों के गैप को समझना अपनी खुद की जिम्मदारी है । 

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भावना एटसेटरा शब्दों को जितना चाहे ,उतना भ्रष्ट किया जा सकता है ।#अनुभव ज्ञान 

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लोगों के जीवन में प्रेम 

और

 मेरे अध्ययन मे आगम ज्ञान की भांति 

चर्चाओं मे तिरंगा कब आ गया ,पता ही नही चला ।😂

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यू ट्यूब भी स्रोत है लेखको की कमाई का । लेखक विंग, विमर्श विंग, दर्शन विंग एटसेटरा । 

पर सबसे पहली बात है क्षुद्रता का त्याग। 

लेने का नही ,देने का भाव।

हरेक लेखक एक विशाल लेखन परम्परा के बीच का बुलबुला है। अपने होने की अमरता का इतना मान ही काफी है ।

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बात ऐसे शुरु हुई थी कि लेखकों के गोष्ठी स्थल सूने क्यूं हैं । अन्यथा न लेना,  क्षुद्रताएं देखकर लगता है ;जितनी पूछ है , सो भी ज्यादा ही है । 

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मैं तो बहुत शिद्दत से इस जरुरत को महसूस करती हूं कि लेखकों की किसी टीम से पहले ,

लेखकों से सावधान रहें ।

अपनी समझ के जिम्मेदार आप खुद हैं ।

ये बौनी समझ के देवता हैं ।

टाइप एडवाइजरी पहले प्रचलित की जानी चाहिए। 

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महावीर स्वामी जी सबकी रक्षा करें ।

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