कल की पोस्ट की समीक्षा -
यह भी मेरे लिखने की शैली का एक आयाम है । यूं तो ऐसे मौके कम आते हैं ; जब पोस्ट लिखकर कोई महत्वपूर्ण बात क्लिक कर जाती है ।उसे मै अगले दिन दर्ज कर देती हूं।
छन्द अनुशासन वगैरह का ज्ञान काव्य शास्त्र के अन्तर्गत आता है। यह सब अब पॉपुलर ज्ञान की श्रेणी मे नही आते ।
मैं देखती हूं ज्ञान का बहुत हिस्सा प्रायः एक व्यापक निगलेक्ट का शिकार है । इनसे जुड़े लोग 'बचाने' की आत्म-शांति विनाशिनी चिंता से ग्रस्त रहते हैं । धर्म वालों का भी यही हाल है ।
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एक ओर दुनिया में/सब जगह में अशान्ति बढ़ रही है , दूसरी ओर .....
पता नही काॅर्ड कहाँ मिसिंग है ।
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