कल की पोस्ट की पुनः समीक्षा -
एक बहुत बड़ा गैप होता है ,इन्सान की समझ और चाहत में । शास्त्रीय भाषा में ज्ञान और काम-भोग कहा गया है ।
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बचपन अवस्था में ,जब स्वयं की चाहतें मिनिमम होती हैं , तब ज्ञान सीखना बोझ नही होता । आपने देखा होगा बच्चे कैसे मजे मजे में लम्बे लम्बे पाठ याद करके सुना देते हैं ।
मुझे खूब शौक था -कैलीग्राफी का, कढ़ाई वगैरह का ।
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जब बड़े होते हैं ,तब झमेला शुरु होता है ।
अच्छा!यह झमेला भी है , अपनी क्षमता की आजमाइश भी है ।
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शांति तब प्रकट होती है जब इंसान इस गैप को भरने की काॅर्ड सेट कर लेता है ।
यह आत्म-संयम से ही संभव होता है ।
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