शुक्रवार, 9 दिसंबर 2016

फ़िल्मी कहानियां -4

जागृति शब्द गीता का है |जैन दर्शन में इसे समकित या सम्यक्त्व दर्शन कहते हैं |
जागृति  के बाद आप के अन्दर प्यास जगती है और जानने की |आपकी रूचि बदल जाती है |
मुझे तो मेरे बैकग्राउंड के कारण  ज्यादा प्रॉब्लम नहीं हुई | मेरे साथ तो ऐसा हुआ कि इधर मैंने सोचा हुबलाबुब्लाबू से निकलने का और उधर गुरूजी आ गए मेरे पास ,मेरी उंगली पकड़ ली और उस रास्ते पर ले आये |मैं बोली -अरे गुरूजी ,मेरा घर है ,परिवार है | इनके बिना मेरा जी कैसे लगेगा ?तो सेठजी तो इतने भोले हैं ,बोले अच्छा ,ऐसी बात है,  तो चल मैं  यहीं रुका हूँ ,तू मिल ले अपने लोगों से |तब से अब तक ,मैं हूँ तो अभी घर में पर बाहर निकल झांकती रहती हूँ ,कहीं सेठजी चले न जाए | मुझे लगता है -सेठजी जरुर कोई जादू मंतर जानते हैं |अपने जैसा कोई मेरे यहाँ बैठा दिया है ...और खुद गोहाना में जाने की तयारी कर ली है | 

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