मंगलवार, 20 दिसंबर 2016

कुछ बातें इधर उधर की

कीर्ति ,यश ,ख्याति -ये चीजें अमूर्त होते हुए भी मूर्त चीजों से ज्यादा महत्वपूर्ण होती हैं |यह बात मैंने फिल्म स्टार्स के ट्वीट्स वगैरह पढ़कर रिअलाइज़ की |एक आम आदमी की नज़र में तो अमिताभ बच्चन ,शाहरुख़ खान ,सलमान वगैरह सभी पॉपुलर हैं |वो पॉपुलैरिटी को कम - ज्यादा में नहीं आंक सकता |
मगर मूर्त चीजों के माप-तोल की तरह कीर्ति ,यश ,ख्याति -इनका भी माप-तोल होता है | विज्ञ इस बात को समझते हैं |
अमिताभ जी के यहाँ हर संडे विजिटर्स आते हैं |35 साल से |कुली के हादसे के बाद  से | हैं न कमाल की बात |क्या यह बात ,अमिताभ की ओर से एक चुनौती नहीं की देखो 'तुम क्या पॉपुलर हो मेरे सामने |पॉपुलैरिटी तो इसे कहते है |"
इसी तरह साऊथ के स्टार रजनीकांत की पॉपुलैरिटी की 'गहराई ' की तारीफ अमिताभ भी करते हैं |
ख्याति के बारे में शेक्सपियर के नाटकों का एक संवाद है कि धन को लूटने वाला तो आखिर क्या लूट ले जाता है (अर्थात कुछ भी नहीं ),मगर नाम को लूटने वाला सब कुछ लूट ले जाता है |

 नहीं नहीं ,ऐसा नहीं करना |देखेंगे इस बात को भी |मेरे पास एक आइडिया है | 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें