सोमवार, 5 दिसंबर 2016

काफी हैविनेस हो गयी है |थोडा लाइट करते हैं |
शाहरुख़ खान ने एक इंटरव्यू में कहा -the only way to move from a bad phase is to work more .actually you have no option either .
कितनी सुंदर बात है |
मुझे फ़िल्मी कलाकारों के इंटरव्यूस  वगैरह देखने का बहुत शौक है |बहुत शौक है |पर मैं देखती हूँ ज्यादातर स्तरीय इंटरव्यूस इंग्लिश में ही हैं | हिंदी में ढंग के हैं ही नहीं |1-२ को छोड़कर |बल्कि हिंदी में ,कई तो इतने बचकाने होते हैं कि देखकर हंसी आती है कि क्या पूछ रहे हैं |वे लोग भी हँसते हैं |
एक जगह मैंने देखा दिलवाले की प्रमोशन पर एक ने शाहरुख़ से पूछा की आप गौरी को भी टुकुर टुकुर देखते थे क्या ?साथ में गाने की क्लिप चला दी और ये सवाल दाग दिया |बेचारा शाहरुख़ ....वो बोला भी कि इतनी  पुरानी बात पर कहाँ से पहुंच गए ....पर नहीं .....फिल्म में टुकुर टुकुर गाना है तो पत्रकार जी को तो यही सवाल पूछना है ................. हिंदी वालों का गानों से ओबसेशन ..... कमाल है|
इंग्लिश में भी कई तो स्तरीय है ,कई तो इंग्लिश की आड़ में पर्सनल तांक -झाँक ज्यादा करते है |वे तो और भी ज्यादा बुरे लगते हैं |एटलीस्ट बेचारे हिंदी वालों में कुछ मासूमियत तो है |
इंग्लिश में जो स्तरीय है ,वे अच्छा काम कर रहे है |अनुपमा , tete-e -tete वाली ,ndtv वगैरह |
इन इंटरव्यूस से फिल्म मेकिंग ,कहानी ,इंडस्ट्री ,वर्क एथिक्स ,अप्स एंड डाऊन,बाज़ार  .......रिलेशनशिप्स ...........बहुत सी बातें पता चलती है | नॉलेज बढती है |मुझे तो देखने का बहुत शौक है |

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