उस दिन टी वी पर अक्षय कुमार की सिंग इज़ ब्लिंग आ रही थी (आती ही रहती है ) ,और इस फिल्म को देखकर मैंने सोचा कि इस तरह की फिल्मे मैं किस तरह कभी भी लिख पाऊंगी ,अक्षय कितने उम्दा एक्टर हैं |मेरे लिए तो संभव ही नहीं है |कहाँ अक्षय पंजाब से ,कहाँ एनी रोमानिया की .......वो तो हिंदी भी नहीं समझती ...इसलिए ट्रांसलेटर का लारा का किरदार डाला .....इस किरदार के आने से .....ट्रांसलेशन के घुमावों से ही कितनी चटपटी ,मजेदार सिचुएशन बन गयी ....मैं तो इस तरह कभी सोच नहीं पाऊंगी .......मेरा तो दिमाग ही नहीं चलेगा ....एटसेट्रा एटसेट्रा |
मेरे मनोसंकल्प भग्न हो गए और मैं उदास हो गयी |
फिर सलमान की सुल्तान आ गयी |यह भी देखी |.......पर मेरा द्वंद्व ज्यों का त्यों था |मुझे कुछ सूझ नहीं रहा था |
फिर ndtv की वेबसाईट पर मैंने सुल्तान फिल्म के राईटर अली (ये पूरा नाम नहीं है ) का इंटरव्यू पढ़ा |वे बताते हैं कि सुल्तान फिल्म का आइडिया उन्हें तब आया ,जब सुशील ने ओलंपिक्स में मैडल जीता था | तब उन्हें लगा कि एक हरियाणवी पहलवान की सक्सेस स्टोरी (पाठक ध्यान दें ,कि ,यह कहानी आलरेडी सक्सेसफुल है )पर एक कहानी बनानी चाहिए |
तब मैंने इस पहेली को सुलझाया कि जब आपके पास आलरेडी एक सक्सेसफुल कहानी है ....तब लास्ट के सीन के ....इंडिया जीताओ ....पब्लिक खुश ....हीरो की हीरोपंती .....वीर -उदात्त पूर्ण रस परिकल्पना .....; यह सब तो हो ही गया ....बस अब तो सलमान के हिसाब से कुछ मजाक-वजाक ,गाने ,........ये सब डालने हैं|
अर्थात
यह सब उतना मुश्किल भी नहीं था जितना मैं समझ रही थी |...अभी हाल की रिलीज़ फिल्मो नीरजा ,एयर लिफ्ट ,रुस्तम ,सरबजीत ,दंगल ...इत्यादि फिल्मो को देखें ..तो ये फिल्मे उन सक्सेसफुल ऑपरेशंस पर आधारित है ,जो रियल लाइफ में कहीं न कहीं अंजाम होते हैं |
सुल्तान की कहानी लगभग ठीक थी |बाद में लेखक ने कहानी का .........सफलता का गरूर नहीं करना चाहिए ...में जो एक्सटेंशन किया ....तो वो भी हमारी चिंतन परंपरा से मेल खाता है .....पर आजकल ज़रा ओवर लगता है |
मेरे मनोसंकल्प भग्न हो गए और मैं उदास हो गयी |
फिर सलमान की सुल्तान आ गयी |यह भी देखी |.......पर मेरा द्वंद्व ज्यों का त्यों था |मुझे कुछ सूझ नहीं रहा था |
फिर ndtv की वेबसाईट पर मैंने सुल्तान फिल्म के राईटर अली (ये पूरा नाम नहीं है ) का इंटरव्यू पढ़ा |वे बताते हैं कि सुल्तान फिल्म का आइडिया उन्हें तब आया ,जब सुशील ने ओलंपिक्स में मैडल जीता था | तब उन्हें लगा कि एक हरियाणवी पहलवान की सक्सेस स्टोरी (पाठक ध्यान दें ,कि ,यह कहानी आलरेडी सक्सेसफुल है )पर एक कहानी बनानी चाहिए |
तब मैंने इस पहेली को सुलझाया कि जब आपके पास आलरेडी एक सक्सेसफुल कहानी है ....तब लास्ट के सीन के ....इंडिया जीताओ ....पब्लिक खुश ....हीरो की हीरोपंती .....वीर -उदात्त पूर्ण रस परिकल्पना .....; यह सब तो हो ही गया ....बस अब तो सलमान के हिसाब से कुछ मजाक-वजाक ,गाने ,........ये सब डालने हैं|
अर्थात
यह सब उतना मुश्किल भी नहीं था जितना मैं समझ रही थी |...अभी हाल की रिलीज़ फिल्मो नीरजा ,एयर लिफ्ट ,रुस्तम ,सरबजीत ,दंगल ...इत्यादि फिल्मो को देखें ..तो ये फिल्मे उन सक्सेसफुल ऑपरेशंस पर आधारित है ,जो रियल लाइफ में कहीं न कहीं अंजाम होते हैं |
सुल्तान की कहानी लगभग ठीक थी |बाद में लेखक ने कहानी का .........सफलता का गरूर नहीं करना चाहिए ...में जो एक्सटेंशन किया ....तो वो भी हमारी चिंतन परंपरा से मेल खाता है .....पर आजकल ज़रा ओवर लगता है |
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