मंगलवार, 13 दिसंबर 2016

फ़िल्मी कहानिया -5

हाँ ,तो बात चल रही थी फ़िल्मी कहानियों की |
बीच में कई टॉपिक चल पड़े ,तो बात कहाँ की कहाँ पहुंच गयी |खैर ...
अभी हाल ही में करण जौहर की ''ए दिल ...' देखी थी तो वहीँ से शुरू कर लेते है |
एक डाइरेक्टर के तौर पर मैंने करन को सिरियसली नहीं लिया था |इसलिए नहीं कि 'कुछ कुछ ..'',कभी ख़ुशी ., जैसी फिल्मे पसंद नहीं |नहीं |ये फिल्मे मुझे पसंद हैं-बल्कि मैं तो फैन हूँ ऐसी ब्लोकबस्टर फिल्मो की |बट ........the thing is, you  should grow with time .if you dont ,that ,ultimately stales you and  make you worthless.
करण की आरंभिक फिल्मे ,फिर ये जितना काम करते हैं ,जितना  ज्यादा बोलते हैं (he is everywhere) ,तो मेरा परसेप्शन ये था की ये बंदा डाई -हार्ड बिजनेसमैन है ,नथिंग एल्स |
पर ए दिल मुझे पसंद आई |...........contd
एक बात और -आगे से ना ,मैं साहित्य की जगह लिटरेचर कहा करुँगी |साहित्य कहने से  लद्धडपना सा लगता है |


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