सोमवार, 17 अप्रैल 2023

 Mk की वाॅल पर जो गाँव की फोटोज़ है वो तो ऐसी लगती है पेन्टिंग हों ।सही में .....

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(यह नोट बाद मे लिखा था ।पोस्ट नही किया ।)

एक अन्य अर्थ में मुझे पुष्पा जिज्जी चैनल का कार्य बहुत महत्वपूर्ण लगता है ।शायद यही वह वजह भी है कि मैने उन पर लिखना चुना है ।

अगर हम नारीवाद के सब नजरियों को मिलाकर इनके कार्य का आकलन करें तो हमे लगेगा कि एक विशाल भीमकाय पितृसत्ता की चट्टान को सोने की छैनी जैसे प्रहार से तोड़े जाने की विफल हास्यास्पद कोशिश मे लगी है ।

हो सकता है यह कहना सही हो ।

फिर भी मैं कहूंगी महिलाओं के लिए यही रास्ता उचित है ।

घर की दाह से दुखी होकर महिलाएं बाहर आती हैं । पर बाहर कौन बैठा है उन्हे सहारा देने के लिए। बाहर निकल कर वे पाती है कि यह दुनिया उतनी ही क्रूर और मतलबी है ।

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मुझे सुरक्षित महिलाएं अच्छी लगती है ।

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बेशक इसके लिए मुझे उस विशाल भीमकाय चट्टान जितना धैर्य ही क्यों न धारण करना पड़े । 

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क्योकि पितृसत्ता के धोखे मे धर्म से लड़ाई मोल लेना वास्तव मे दूध के दांतो से लोहे के चने चबाने जैसा हास्यास्पद और विफल प्रयास है ।

हम देखते है धर्म शास्त्रों मे स्त्रियों के प्रति निन्दात्मक वाक्यावलियां कही गई है । सब सच हैं । 

बस बात उस दृष्टि के पकड़ मे आने की है जब ये बाते सच लगती है ,फिर वह चाहे पुरुष हो या स्त्री । 

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(यह नोट पहले लिखा था ।पोस्ट नही किया ।)

Rahul gandhi ji looks so peaceful these days .

😊

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