पता नही सब कैसे होगा । एकबार लगता है कि सब हो चुका है ,बस एक्जीक्यूट करना रह गया है।बट ।फिर भी नर्वसनेस है ।
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अध्यात्म मे अहंकार को बुरा कहा गया है । सच है । बट दुनिया मे जीने के लिए ये खोल जरूरी भी है ।
इस खोल के भीतर ही होता है आदमी का सारा बल ,बुद्धिे , शक्ति पराक्रम, ज्ञान-अज्ञान। फिर वह चाहे चींटी की खोल जैसी नगण्य ही क्यो न हो ।
सोचती हूं कि छोटे -बड़े जिसके जैसे भी अहंकार हो वे सब महावीर वाणी मे मिल जाएं ।
एक वे ही है जो सबके घमंड सम्हाल सकते है ।
यह मेरी दिली कामना है सबके लिए।
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रीसेन्टली मुझे लग रहा है मै पेस मिस कर रही हूं ।मुझे समझ नही आ रही बातें ।
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अभी तो हम सबकी गालियां खा रहे है ।जिन्हे लिया है उनकी भी जिन्हे नही लिया उनकी भी ।
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