मुझे लगता है कि अब तो सभी को लगता होगा -ये कहाँ फँस गए । मुझे तो 19 बाद से लग रहा है ।खैर
पहले तो सबमें बहुत आपसदारी थी ।उस समय मैने एक दूसरे की वाॅल से ही पढ़कर जाना था । पसंद आया तो सोचा टीम बनाकर ट्राई करते है ।
मैने समझा था कि मै ही अजनबी हूं ।
इतने सालों मे बहुत कुछ बदल गया है।खैर
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अभी हालिया तो मैने यह सोचा था कि अब इन से परे ही रहती हूं ।इनके इशूज का ये खुद जाने ।ये कोई बच्चे तो नही है ।अपना भला बुरा ,हानि -लाभ खुद जानते है ।
बल्कि 5-2-23 को उत्साह मे डायरी मे नोट लिखा कि कम से कम मेरे तईं यह कार्य पूरा हो गया है । मै एक कन्विक्शन लेकर चली थी ।जिसे उस पे भरोसा हुआ,वह साथ है । बाकी अपनी खुद देखें ।
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इस बीच मुझे भी लिखने से प्रेम हो गया है । ज्यादा तो नही लिखती । मन मुताबिक ही लिखती हूं ।
मैने सोच लिया है । अगर कुछ नही हुआ तो भी मै लिखती रहूंगी । दुनिया मे एकान्तसेवी चुप्पे लिखने वाले भी हुए है । यह मेरी नेचर को ज्यादा सूट करता है ।
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