गुरुवार, 20 अप्रैल 2023

 प्रेम का एक रूप ऐसा है जिसमे सती शिव और शिव सती हो जाते है । उत्कर्षता में यह रूप भक्ति,पूजा के समकक्ष हो जाता है ।

निश्चित रूप से इसमे शक्ति है अलौकिक से भी लड़ जाने की ।

....यह दृष्टि की बात है ।

संसार विरत दृष्टि मे करूणा महत्वपूर्ण हो जाती है ।

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